Kala Aur Boodha Chand
Published
2007
Pages
220
Language
Hindi
ISBN
9788126714445
About this book
‘कला और बूढ़ा चाँद’ सुविख्यात कवि सुमित्रानन्दन पंत की साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त काव्यकृति है। इसमें उनकी सन् 1958 में लिखी गई कविताएँ हैं। शैली और विषय-वस्तु दोनों ही दृष्टियों में कवि की परवर्ती रचनाओं में इनका विशिष्ट स्थान है। अरविन्द- दर्शन और भारतीय मनोविज्ञान के जो प्रभाव उनकी रचनाओं में कुछ समय से दृष्टिगोचर हो रहे थे, उनका पूर्ण परिपाक प्रस्तुत संग्रह में हुआ है। कवि ने उन तमाम प्रभावांे को आत्मसात कर जिस अतींद्रिय भावमंडल का आख्यान यहाँ किया है, वह सर्वथा उसका अपना है, आत्मानुभूत है। चेतन-अवचेतन के स्तरों का भेदन करते हुए अतिचेतन का अवलोकन इन कविताओं की विषय-वस्तु है, जिसे कवि ने दार्शनिक और तात्त्विक प्रतीकों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयत्न किया है। मुक्त छंद का प्रयोग पंत जी बहुत प्रारम्भ से ही करते रहे हैं, किन्तु छंद-भंग की वास्तविक स्थिति ‘वाणी’ से प्रारम्भ हुई और उसका पूर्ण विकास ‘कला और बूढ़ा चाँद’ में हुआ है। इन कविताओं में कवि ‘छंदों की पायलें उतार’ देता है, शब्दों को तोड़कर उनमें नई अर्थवत्ता का संचार करता है और इस प्रकार अपनी अभिव्यक्ति के उपकरणों को उसने इतना समर्थ बना लिया है कि उनके द्वारा ‘अविगत गति’ का प्रकाशन किया जा सके। वस्तुतः पंत जी के चेतनाशील काव्य के अध्येताओं के लिए यह एक अपरिहार्य कृति है।
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"कला और बूढ़ा चाँद" हिंदी साहित्य के गंभीर अध्येताओं, विशेषकर सुमित्रानंदन पंत के काव्य और भारतीय दर्शन में रुचि रखने वालों के लिए एक अनिवार्य कृति है। यह गहन दार्शनिक और तात्त्विक प्रतीकों से भरी है, जो चेतना के विभिन्न स्तरों का अन्वेषण करती है। यदि आप हल्की-फुल्की या आसान कविताएँ पसंद करते हैं, तो यह आपके लिए नहीं है।
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कला और बूढ़ा चाँद सुमित्रानंदन पंत की साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त काव्यकृति है, जिसमें 1958 की कविताएँ संकलित हैं। यह उनकी परवर्ती रचनाओं में विशिष्ट स्थान रखती है, जहाँ अरविंद-दर्शन और भारतीय मनोविज्ञान का पूर्ण परिपाक हुआ है। इन कविताओं में कवि चेतन-अवचेतन के स्तरों को भेदते हुए अतिचेतन का अवलोकन दार्शनिक प्रतीकों के माध्यम से करता है। मुक्त छंद का प्रयोग और शब्दों में नई अर्थवत्ता का संचार इसकी शैलीगत विशेषताएँ हैं, जो इसे पंत जी के चेतनाशील काव्य के अध्येताओं के लिए एक अपरिहार्य कृति बनाती हैं।
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